मानव जीवन

ज़ोया हसन – लखनऊ (आर्मी पब्लिक स्कूल-1, नेहरू रोड ) कक्षा-7 जी

रण भूमि में जाने को कहता है,
तो जाने से मत डर,
कहता है बात बेखौफ़,
तो करने से मत डर,
ये जीवन भी तो एक रणभूमि है,
यहाँ पराजय से भी यात्रा नहीं रूकती,
डाल उस पे पसीने की एक एक बूंद,
हर पल यहाँ एक नई चुनौती,
हार आती है तो आने दे,
बहा मत आँसू की बूंदें,
अगर आए न हार तो  जीत प्राप्ति का,
अनुमान लगे कैसे,
यह जीवन भी तो है सुई-धागा,
सुई है मानव जीवन और धागा शरीर,
सिलते जाएँ तो बढ़ते जाएंगे,
रूक गए तो फिर कुछ नहीं,
न हूंगी मैं सौभाग्यशाली,
अगर मिल जाए सोना चांदी एवं धन,
सफल होगी तब मेरी यात्रा,
जब मेरे बोलों से बदल जाए किसी का जीवन”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *