शजर प्यार का

              फ़ीरोज़ हसन, सुल्तानपुरी       

“जल न जाएँ कहीं हालात, बचाए रखिए
क़ीमती आँसू-ओ-जज़्बात बचाए रखिए
            जिसके एखलाक़ के पत्तों से हवा आती हो
            वो शजर प्यार का दुनिया में लगाए रखिए
मिल ही जाएंगे मुक़ामात, अगर ठाना है
दिल में उम्मीद की शम्मा को जलाए रखिए
            आप ही हैं जो निकल सकते हैं तूफानों से
            अपने बाज़ू के भरोसे को जगाए रखिए
कितनी मेहनत से संवारा है नशेमन अपना
फूल खिलने के रवायात बनाए रखिए
            लोग मारेंगे लदी शाख़ों पे खुलकर पत्थर
            फिर भी संजीदा ख़यालात बनाए रखिए”

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