हमारे बारे में

कविता हमारे हृदय का एक ऐसा उद्गार है जो हर व्यक्ति के भीतर होता है, भले ही वह कविता लिखने में निपुण हो, मध्यम श्रेणी का हो अथवा इस विधा से अंजान एक सामान्य श्रोता ही क्यों न हो | अक्सर हम किसी कवि की कविता या शायर के शेर सुन कर जब वाह वाह कहते हैं तो इसका मतलब मात्र यह नहीं होता कि वह  कविता या शेर बहुत अच्छा लिखा गया है, बल्कि इसका मतलब हमारे दिल में छुपे उस भाव से होता है जो उस शेर को खुद कह न सका परंतु पूरी तरह उससे सहमत है | आपको तुरंत ही ऐसा लगता है कि अरे वाह, ये बात तो मैं भी सोचता या सोचती थी | इस संसार में ऐसा कोई नहीं है जो काव्यात्मक प्रतिभा से खाली हो | कवि में और आमजन में अंतर मात्र इतना ही है कि कवि उसी बात को शब्द, लय और व्याकरण के बंधनों में बांध कर कहता है जबकि श्रोता उसे स्वीकार करते हुए इस बात का प्रमाण देते हैं कि कवि द्वारा कही गई बात उनके दिलों का भी उद्गार है |
कविता लेखन मात्र एक विधा ही नहीं है, यह आपके जीवन यापन व  सोचने के स्तर को एक अलग आयाम देती है |  इसमें कोई शक नहीं कि काव्य लेखन एक जन्मजात प्रतिभा होती है, यह ईश्वर की ओर से दिया गया एक अमूल्य अस्त्र है जिसे निरंतर प्रयासों से अधिक धारदार बनाए रखा जा सकता है | हर व्यक्ति चाहे तो अपने भीतर की प्रतिभा को पहचान कर उसे निखार सकता है क्योंकि यह प्रतिभा आपको भी तो ईश्वर ने दी है  | आप छोटे छोटे प्रयास कर अपनी कविता को बेहतर बना सकते हैं | उदाहरण स्वरूप, आप अपने आस पास घट रही समसामयिक घटनाओं को देख कर उन्हें गद्य में तो सरलता से लोगों से साझा कर लेते हैं परंतु उसे काव्य में कहना आपको कठिन लगता है | लेकिन यह इतना कठिन भी नहीं है कि आप स्वयं को पराजित मान बैठें | कुछ उचित शब्द तलाश कर उस घटना को काव्य में कहने का प्रयास कीजिये | विश्वास कीजिये कुछ प्रयासों के बाद आप इसमें सफल हो सकेंगे |
यह हो सकता है कि आप द्वारा किया गया शब्दों का चयन कुछ अच्छा या सटीक न हो परंतु आप को एक एहसास होगा कि आप भी कविता कर सकते हैं | आप साहित्य का अध्ययन करते रहें | शनै: शनै: आप अपनी प्रतिभा को निखरता हुआ पाएंगे | आप दूसरे कवियों की रचनाओं का अवलोकन भी करते रहिए जिससे आपको पता चलता रहेगा कि वे लोग किस प्रकार शब्दों को सही स्थान पर रखते हैं, कविता की लय भी बनाए रखते हैं व व्याकरण संबंधी दोषों से भी दूर रहते हैं |
आप अपने धार्मिक उद्गार, राजनीतिक विचार, हास्य व्यंग्य, प्रेरक प्रसंग, सामाजिक विसंगतियों व अन्य किसी भी समसामयिक विषय पर लिखना प्रारम्भ कीजिये | इस बात को बिलकुल भूल जाईए कि लोग आपकी रचना पर क्या प्रतिक्रिया देंगे | सबसे बुरा रोग, क्या कहेंगे लोग | आपका प्रारम्भ आपको एक नई ऊर्जा देगा, जबकि मात्र लोगों की प्रतिक्रिया के बारे में सोचना आपको नकारात्मक ऊर्जा देगा | क़लम उठाइए, विचारों को झिंझोड़िए, उचित शब्दों को तलाशिए, उन्हें पिरोइए | अगर सही शब्द न मिलें तो दूसरा चयन कीजिये, मगर लिखिए | आपकी सहायता के लिए निम्नलिखित उदाहरण पर्याप्त होगा :-
कल्पना कीजिये कि आप अपने छोटे से घर में परिवार के साथ बैठे हैं और कोई परिचित आता है | बात बात में ही आप से पूछता है कि भई इतने परिवार के साथ आप छोटे से घर में कैसे गुज़ारा कर पाते होंगे | आप कहते हैं कि अब क्या बताएं भाई साहब, दरअसल ये घर बहुत बड़ा था, पुश्तैनी घर था, मगर माँ बाप के देहांत के बाद भाइयों में बटवारा हो गया और हमारे हिस्से में यही आया |
ये तो गद्य में आपने सामान्य रूप से अपनी बात कह दी और सुनने वाला इससे संतुष्ट भी हो गया | लेकिन इसी कथ्य को पद्य में भी कितने सरल शब्दों में खूबसूरती के साथ कहा जा सकता है , इसे आप मशहूर शायर जनाब मुनव्वर राना साहब के लफ़्ज़ों में देखिये, कथ्य वही है मगर अंदाज़ आपको कितना परिचित लगेगा | मुनव्वर राना साहब कहते हैं:-
                “ ये आंगन था मेरे घर का, न जाने कितनी मुद्दत से,
                  बुज़ुर्गों के गुज़रते ही, यहाँ कमरे निकल आए”
आप इन शब्दों से सीख सकते हैं कि अपनी बात को कहने के लिए आपको बहुत ही क्लिष्ट भाषा शैली की ज़रूरत नहीं |  आम जन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सरल शब्दों को मनोभावों के धागे में पिरोकर भी आप प्रसिद्धि के शिखर पर पहुँच सकते हैं | प्रयास कीजिये, प्रयासों से ही लोग सफल होते हैं, दुष्कर लगने वाले काम भी प्रयासों से ही आसान होते हैं | दुष्यंत कुमार साहब ने कहा भी है,”
“कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो”
तो चलिये, आज ही से अपने दैनिक जीवन में काव्य लेखन को भी कुछ समय दीजिये और अनुभव कीजिये कि कैसे आपके विचारों में सरलता और परिपक्वता आती जा रही है | 
आपको सफलता की अनेक शुभकामनाएँ !!!!